कभी रजामंदी, तो कभी बगावत है इश्क,
मोहब्बत राधा की है, तो मीरा की इबादत है इश्क|
आयेंगे तेरी गलि में चाहे देर क्यू न हो जाये,
करेंगे मोहब्बत तुझसे हि चाहे जेल क्यू न हो जाये|
लिखी है खुदा ने मोहब्बत सबकी तक़दीर में,
हमारी बारी आई तो स्याही ही ख़त्म हो गई।
मोहब्बत का कोई रंग नही फिर भी वो रंगीन है,
प्यार का कोई चेहरा नही फिर भी वो हसीन हैं|
तूने मेरा आज देख के मुझे ठुकराया है,
हमने तो तेरा गुजरा कल देख के भी मोहब्बत की थी|
हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी,
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।
मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर थक गया हूँ,
ऐ खुदा किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे जो मौत तक वफा करे|
मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है|
मुझे क़बूल है.. हर दर्द.. हर तकलीफ़ तेरी चाहत में,
सिर्फ़ इतना बता दो.. क्या तुम्हें मेरी मोहब्बत क़बूल है?
एहसान जताना जाने कैसे सीख लिया,
मोहब्बत जताते तो कुछ और बात थी।
मुझ पर सितम करो तो तरस मत खाना,
क्योकि खता मेरी हैं मोहब्बत मैंने किया हैं।
हर मर्ज़ का इलाज़ मिलता था उस बाज़ार में,
मोहब्बत का नाम लिया दवाख़ाने बन्द हो गये|
जहर से खतरनाक है यह मोहब्बत,
जरा सा कोई चख ले तो मर मर के जीता है!
तुम मोहब्बत के सौदे भी अजीब करते हो,
बस मुस्कुरा देते हो और अपना बना लेते हो|
चुपचाप गुज़ार देगें तेरे बिना भी ये ज़िन्दगी,
लोगो को सिखा देगें मोहब्बत ऐसे भी होती है।
मोहब्बत राधा की है, तो मीरा की इबादत है इश्क|
आयेंगे तेरी गलि में चाहे देर क्यू न हो जाये,
करेंगे मोहब्बत तुझसे हि चाहे जेल क्यू न हो जाये|
लिखी है खुदा ने मोहब्बत सबकी तक़दीर में,
हमारी बारी आई तो स्याही ही ख़त्म हो गई।
मोहब्बत का कोई रंग नही फिर भी वो रंगीन है,
प्यार का कोई चेहरा नही फिर भी वो हसीन हैं|
तूने मेरा आज देख के मुझे ठुकराया है,
हमने तो तेरा गुजरा कल देख के भी मोहब्बत की थी|
हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी,
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।
मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर थक गया हूँ,
ऐ खुदा किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे जो मौत तक वफा करे|
मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है|
मुझे क़बूल है.. हर दर्द.. हर तकलीफ़ तेरी चाहत में,
सिर्फ़ इतना बता दो.. क्या तुम्हें मेरी मोहब्बत क़बूल है?
एहसान जताना जाने कैसे सीख लिया,
मोहब्बत जताते तो कुछ और बात थी।
मुझ पर सितम करो तो तरस मत खाना,
क्योकि खता मेरी हैं मोहब्बत मैंने किया हैं।
हर मर्ज़ का इलाज़ मिलता था उस बाज़ार में,
मोहब्बत का नाम लिया दवाख़ाने बन्द हो गये|
जहर से खतरनाक है यह मोहब्बत,
जरा सा कोई चख ले तो मर मर के जीता है!
तुम मोहब्बत के सौदे भी अजीब करते हो,
बस मुस्कुरा देते हो और अपना बना लेते हो|
चुपचाप गुज़ार देगें तेरे बिना भी ये ज़िन्दगी,
लोगो को सिखा देगें मोहब्बत ऐसे भी होती है।
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