इन ग़म की गलियों में कब तक ये दर्द हमें तड़पाएगा,
इन रस्तों पे चलते-चलते हमदर्द कोई मिल जाएगा|
सौदा कुछ ऐसा किया है तेरे ख़्वाबों ने मेरी नींदों से,
या तो दोनों आते हैं, या कोई नहीं आता|
कमाल का जिगर रखते है कुछ लोग,
दर्द पढ़ते है और आह तक नहीं करते।
एक तु मिल जाती तो किसी का कया चला जाता,
तुझे उमर भर के लिए खुशीयाँ ही खुशीयाँ और मुझको मेरा खुदा मिल जाता।
जिन्हें पता है कि अकेलापन क्या होता है, वो लोग,
दूसरों के लिए हमेशा हाजिर रहते हैं|
कोई पत्थर चोट खाके कंकर कंकर हो गया,
और कोई पत्थर चोट सहके शंकर शंकर हो गया|
तमन्नाओ की महफ़िल तो हर कोई सजाता है,
पूरी उसकी होती है जो तकदीर लेकर आता है!!
जिम्मेदारियां बांध देती हैं अपना शहर न छोड़नेको,
वरना कौन तरक्की की सीढीयां चढ़ना नहीं चाहता|
ऐ समुन्द्र तेरे से वाकिफ हूँ, मगर इतना बताता हूँ,
वो आँखे तुझसे ज्यादा गहरी है, जिनका में आशिक हूँ|
कुछ इस तरह बुनेंगे हम अपनी तकदीर के धागे,
कि अच्छे अच्छो को झुकना पड़ेगा हमारे आगे!
बहुत कुछ खरीदकर भी..बहुत कुछ बचा लेता था,
आज के जमाने से तो, वो बचपन का जमाना अच्छा था!!
खामोश बैठे हैं तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नहीं,
और ज़रा सा हंस लें तो लोग मुस्कुराने की वजह पूछ लेते है।
लगता है खुदा मुझे बुलाने वाला है,
रोज़ मेरी झूटी कसमे खा रही है वो|
सुला दिया माँ ने ये कहकर,
परियां आएंगी सपनों में रोटियां लेकर!!
बहके बहके ही, अँदाज-ए-बयां होते है,
आप होते है तो, होश कहाँ होते है|
इन रस्तों पे चलते-चलते हमदर्द कोई मिल जाएगा|
सौदा कुछ ऐसा किया है तेरे ख़्वाबों ने मेरी नींदों से,
या तो दोनों आते हैं, या कोई नहीं आता|
कमाल का जिगर रखते है कुछ लोग,
दर्द पढ़ते है और आह तक नहीं करते।
एक तु मिल जाती तो किसी का कया चला जाता,
तुझे उमर भर के लिए खुशीयाँ ही खुशीयाँ और मुझको मेरा खुदा मिल जाता।
जिन्हें पता है कि अकेलापन क्या होता है, वो लोग,
दूसरों के लिए हमेशा हाजिर रहते हैं|
कोई पत्थर चोट खाके कंकर कंकर हो गया,
और कोई पत्थर चोट सहके शंकर शंकर हो गया|
तमन्नाओ की महफ़िल तो हर कोई सजाता है,
पूरी उसकी होती है जो तकदीर लेकर आता है!!
जिम्मेदारियां बांध देती हैं अपना शहर न छोड़नेको,
वरना कौन तरक्की की सीढीयां चढ़ना नहीं चाहता|
ऐ समुन्द्र तेरे से वाकिफ हूँ, मगर इतना बताता हूँ,
वो आँखे तुझसे ज्यादा गहरी है, जिनका में आशिक हूँ|
कुछ इस तरह बुनेंगे हम अपनी तकदीर के धागे,
कि अच्छे अच्छो को झुकना पड़ेगा हमारे आगे!
बहुत कुछ खरीदकर भी..बहुत कुछ बचा लेता था,
आज के जमाने से तो, वो बचपन का जमाना अच्छा था!!
खामोश बैठे हैं तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नहीं,
और ज़रा सा हंस लें तो लोग मुस्कुराने की वजह पूछ लेते है।
लगता है खुदा मुझे बुलाने वाला है,
रोज़ मेरी झूटी कसमे खा रही है वो|
सुला दिया माँ ने ये कहकर,
परियां आएंगी सपनों में रोटियां लेकर!!
बहके बहके ही, अँदाज-ए-बयां होते है,
आप होते है तो, होश कहाँ होते है|
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