Thursday, 13 October 2016

2 Lines Shayari - मोहब्बत...




    मोहब्बत भी ठंड जैसी है,
    लग जाये तो बीमार कर देती है|

    क्या नाम दूँ मैं अपनी मोहब्बत को,
    कि ये तेरा सिवा किसी और से होती ही नहीं!! ‪

    मुमकिन नहीं है हर रोज मोहब्बत के नए किस्से लिखना,
    मेरे दोस्तों अब मेरे बिना अपनी महफ़िल सजाना सीख लो।

    सुना था.. मोहब्बत मिलती है, मोहब्बत के बदले,
    हमारी बारी आई तो, रिवाज हि बदल गया|

    सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये,
    वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है!!

    बिक रहे हैं ताज महल सड़क-चौराहों पर आज भी,
    मोहब्बत साबित करने के लिए बादशाह होना जरुरी नहीं!!

    बस तुम्हेँ पाने की तमन्ना नहीँ रही,
    मोहब्बत तो आज भी तुमसे बेशुमार करतेँ हैँ|

    पहले रिम-झिम फिर बरसात और अचानक कडी धूप,
    मोहब्बत ओर अगस्त की फितरत एक सी है|

    मोहब्बत अब समझदार हो गयी है,
    हैसियत देख कर आगे बढ़ती है।

    तुझसे मैँ इजहार ऐ मोहब्बत इसलिए भी नही करता,
    सुना है बरसने के बाद बादलो की अहमियत नही रहती|

    अगर तुम समझ पाते मेरी चाहत की इन्तहा,
    तो हम तुमसे नही तुम हमसे मोहब्बत करते|

    उम्र बीत गयी पर एक जरा सी बात समझ नही आई,
    हो जाये जिन से मोहब्बत वो लोग कदर क्यों नही करते|

    मिला क्या हमें सारी उम्र मोहब्बत करके,
    बस एक शायरी का हुनर, एक रातों का जागना|

    उम्र बीत गयी पर एक जरा सी बात समझ नही आई,
    हो जाये जिन से मोहब्बत वो लोग कदर क्यों नही करते|

    बस रिश्ता ही तो टूटा है,
    मोहब्बत तो आज भी हमे उनसे है|

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