Thursday, 13 October 2016

2 Lines Shayari - पागल दिवाना...

 
    कुछ लौग ये सोचकर भी मेरा हाल नहीं पुँछते,
    कि यै पागल दिवाना फिर कोई ‪ शायरी न सुना देँ|

    मोहब्बत खो गयी मेरी, बेवफ़ाई के दलदल में,
    मगर इन पागल आँखो को, आज भी तेरी तलाश रहती है|

    वो अपनी मर्जी से बात करते हैँ और,
    हम कितने पागल हैँ जो उनकी मर्जी का इंतजार करते हैं|

    जुनून, हौसला, और पागलपन आज भी वही है,
    मैंने जीने का तरीका बदला है तेवर नहीं|

    आजकल के हर आशिक की अब तो यही कहानी है,
    मजनू चाहता है लैला को, लैला किसी और की दीवानी है|

    मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर,
    मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हें याद करते करते|

    सिलसिला ये चाहत का दोनो तरफ से था,
    वो मेरी जान चाहती थी और मैं जान से ज्यादा उसे।

    अपने वजूद पर इतना न इतरा ए ज़िन्दगी,
    वो तो मौत है जो तुझे मोहलत देती जा रही है|

    होता अगर मुमकिन, तुझे साँस बना कर रखते सीने में,
    तू रुक जाये तो मैं नही, मैं मर जाऊँ तो तू नही|

    आज तो हम खूब रुलायेंगे उन्हें,
    सुना है उसे रोते हुए लिपट जाने की आदत है|

    वह मेरा वेहम था की वो मेरा हमसफ़र है,
    वह चलता तो मेरे साथ था पर किसी और की तलाश में।

    नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा,
    बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है|

    मैंने उसे बोला ये आसमान कितना बड़ा है ना,
    पगली ने गले लगाया और कहा इससे बड़ा तो नहीं|

    नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा,
    बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है|

    पता नही कब जाएगी तेरी लापरवाही की आदत,
    पगली कुछ तो सम्भाल कर रखती, मुझे भी खो दिया|

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