मोहब्बत न सही मुकदमा कर दे मुज पर,
कम से कम तारीख दर तारीख मुलाकात तो होगी ।
तेरी यादों ने मुझे क्या खूब मशरूफ किया है ऐ सनम,
खुद से मुलाकात के लिए भी वक़्त मुकर्रर करना पड़ता है।
हम कुछ ना कह सके उनसे, इतने जज्बातों के बाद,
हम अजनबी के अजनबी ही रहे इतनी मुलाकातो के बाद।
बडी अजीब मुलाकातें होती थी हमारी,
वो किसी मतलब से मिलते थे और हमे तो सिर्फ मिलने से मतलब था|
वहीँ तारीख वहीँ दिन वहीँ समा बस,
वो लोग नहीं जिन्होंने बना दिया यादगार हर लम्हा|
जींदगी गुझर गई सारी कांटो की कगार पर,
और फुलो ने मचाई है भीड़ हमारी मझार पर|
सुनो तुम मेरी जिद नहीं जो पूरी हो,
तुम मेरी धड़कन हो जो जरुरी हो|
और कितने इम्तेहान लेगा वक़्त तू,
ज़िन्दगी मेरी है फिर मर्ज़ी तेरी क्यों|
इश्क़ है या कुछ और ये तो पता नहीं,
पर जो तुमसे है वो किसी और से नही|
ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है,
तो मेरा लहू लेले, यू कहानिया अधूरी न लिखा कर।
निकाल दिया उसने हमें अपनी ज़िन्दगी से भीगे कागज़ की तरह,
ना लिखने के काबिल छोड़ा, ना जलने के|
तेरी जगह आज भी कोई नहीं ले सकता,
पता नहीं वजह तेरी खूबी है या मेरी कमी|
तुम्हारा साथ तसल्ली से चाहिए मुझे,
जन्मों की थकान लम्हों में कहाँ उतरती है|
तेरी ज़िन्दगी में ना सही !!
पर तारीख में तो आज भी 13 ही हूँ|
ना प्यार कम हुआ है ना ही प्यार का अहेसास,
बस उसके बिना जिन्दगी काटने की आदत हो गई है|
कम से कम तारीख दर तारीख मुलाकात तो होगी ।
तेरी यादों ने मुझे क्या खूब मशरूफ किया है ऐ सनम,
खुद से मुलाकात के लिए भी वक़्त मुकर्रर करना पड़ता है।
हम कुछ ना कह सके उनसे, इतने जज्बातों के बाद,
हम अजनबी के अजनबी ही रहे इतनी मुलाकातो के बाद।
बडी अजीब मुलाकातें होती थी हमारी,
वो किसी मतलब से मिलते थे और हमे तो सिर्फ मिलने से मतलब था|
वहीँ तारीख वहीँ दिन वहीँ समा बस,
वो लोग नहीं जिन्होंने बना दिया यादगार हर लम्हा|
जींदगी गुझर गई सारी कांटो की कगार पर,
और फुलो ने मचाई है भीड़ हमारी मझार पर|
सुनो तुम मेरी जिद नहीं जो पूरी हो,
तुम मेरी धड़कन हो जो जरुरी हो|
और कितने इम्तेहान लेगा वक़्त तू,
ज़िन्दगी मेरी है फिर मर्ज़ी तेरी क्यों|
इश्क़ है या कुछ और ये तो पता नहीं,
पर जो तुमसे है वो किसी और से नही|
ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है,
तो मेरा लहू लेले, यू कहानिया अधूरी न लिखा कर।
निकाल दिया उसने हमें अपनी ज़िन्दगी से भीगे कागज़ की तरह,
ना लिखने के काबिल छोड़ा, ना जलने के|
तेरी जगह आज भी कोई नहीं ले सकता,
पता नहीं वजह तेरी खूबी है या मेरी कमी|
तुम्हारा साथ तसल्ली से चाहिए मुझे,
जन्मों की थकान लम्हों में कहाँ उतरती है|
तेरी ज़िन्दगी में ना सही !!
पर तारीख में तो आज भी 13 ही हूँ|
ना प्यार कम हुआ है ना ही प्यार का अहेसास,
बस उसके बिना जिन्दगी काटने की आदत हो गई है|
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