नज़रों से दूर सही दिल के बहुत पास है तू,
बिखरी हुई इस ज़िन्दगी में मेरे जीने की आस है तू|
बड़े शौक से बनाया तुमने मेरे दिल मे अपना घर,
जब रहने की बारी आई तो तुमने ठिकाना बदल दिया।
तेरी मुहब्बत पर मेरा हक तो नही पर दिल चाहता है,
आखरी सास तक तेरा इंतजार करू!
जिस्म उसका भी मिट्टी का है मेरी तरह,
ए खुदा “फिर क्यू सिर्फ मेरा ही दिल तडफता है उस के लिये|
ख़ामोशी बहुत कुछ कहती हे,
कान लगाकर नहीं, दिल लगाकर सुनो|
तेरी गली में आकर के खो गये हैं दोंनो,
मैं दिल को ढ़ूँढ़ता हुँ दिल तुमको ढ़ूँढ़ता है|
निकली थी बिना नकाब आज वो घर से,
मौसम का दिल मचला लोगोँ ने भूकम्प कह दिया|
जिन्दगी की राहों में मुस्कराते रहो हमेशा,
उदास दिलों को हमदर्द तो मिलते हैं, हमसफ़र नहीं|
तुम दूर हो या पास फर्क किसे पड़ता है,
तू जँहा भी रहे तेरा दिल तो यँही रहता है|
तेरे बाद हमने इस दिलका दरवाज़ा खोला ही नही,
“वरना” बहुत से चाँद आये इस घर को सजाने के लिए|
नज़र चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है प्यार करना,
क्या बताएं इस दिलका आलम, नसीब मैं लिखा है इंतज़ार करना|
सुकून ऐ दिल के लिए कभी हाल तो पूँछ ही लिया करो,
मालूम तो हमें भी है कि हम आपके कुछ नहीं लगते|
दिल से पूछो तो आज भी तुम मेरे ही हो,
ये ओर बात है कि किस्मत दग़ा कर गयी।
इश्क का धंधा ही बंद कर दिया साहेब,
मुनाफे में जेब जले.. और घाटे में दिल|
फितरत, सोच और हालात में फर्क है,
वरना ,इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नही होता|
बिखरी हुई इस ज़िन्दगी में मेरे जीने की आस है तू|
बड़े शौक से बनाया तुमने मेरे दिल मे अपना घर,
जब रहने की बारी आई तो तुमने ठिकाना बदल दिया।
तेरी मुहब्बत पर मेरा हक तो नही पर दिल चाहता है,
आखरी सास तक तेरा इंतजार करू!
जिस्म उसका भी मिट्टी का है मेरी तरह,
ए खुदा “फिर क्यू सिर्फ मेरा ही दिल तडफता है उस के लिये|
ख़ामोशी बहुत कुछ कहती हे,
कान लगाकर नहीं, दिल लगाकर सुनो|
तेरी गली में आकर के खो गये हैं दोंनो,
मैं दिल को ढ़ूँढ़ता हुँ दिल तुमको ढ़ूँढ़ता है|
निकली थी बिना नकाब आज वो घर से,
मौसम का दिल मचला लोगोँ ने भूकम्प कह दिया|
जिन्दगी की राहों में मुस्कराते रहो हमेशा,
उदास दिलों को हमदर्द तो मिलते हैं, हमसफ़र नहीं|
तुम दूर हो या पास फर्क किसे पड़ता है,
तू जँहा भी रहे तेरा दिल तो यँही रहता है|
तेरे बाद हमने इस दिलका दरवाज़ा खोला ही नही,
“वरना” बहुत से चाँद आये इस घर को सजाने के लिए|
नज़र चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है प्यार करना,
क्या बताएं इस दिलका आलम, नसीब मैं लिखा है इंतज़ार करना|
सुकून ऐ दिल के लिए कभी हाल तो पूँछ ही लिया करो,
मालूम तो हमें भी है कि हम आपके कुछ नहीं लगते|
दिल से पूछो तो आज भी तुम मेरे ही हो,
ये ओर बात है कि किस्मत दग़ा कर गयी।
इश्क का धंधा ही बंद कर दिया साहेब,
मुनाफे में जेब जले.. और घाटे में दिल|
फितरत, सोच और हालात में फर्क है,
वरना ,इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नही होता|
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